The Bengal Files Review: क्या यह 1940s की काली इतिहास को फिर से जगाता है?
परिचय
विवेक अग्निहोत्री की चर्चित फाइल्स ट्रिलॉजी की तीसरी कड़ी, The Bengal Files, सिनेमाघरों में 5 सितंबर, 2025 को रिलीज़ हो चुकी है। यह फिल्म डायरेक्ट एक्शन डे और नोआखली जैसी 1940 के दशक की साम्प्रदायिक हिंसा की घटनाओं पर आधारित है। The Tashkent Files और The Kashmir Files के बाद, यह फिल्म एक और ज़िम्मेदार इतिहास को पर्दे पर लाती है।
कहानी और प्रारूप
एक सीबीआई अधिकारी शिवा पंडित (दरशन कुमार) एक स्थानीय पत्रकार की गुमशुदगी की जांच करता है।
फिल्म एक आधुनिक कहानी को इतिहास में जोड़ती है—इससे पहले ज़माने के हिंदू नरसंहार की त्रासदी सामने आती है।
पहला 40 मिनट अवास्तविक हिंसा और दृश्यता से भरा है, जिससे दर्शकों पर गहरा असर होता है।
निर्माता हिस्टोरिकल घटनाएं ‘नरमाने’ की बजाय सीधे दिखाने से पीछे नहीं हटते, जिससे फिल्म गहरी दर्दनाक लगती है।
कलाकारों का अभिनय
मिथुन चक्रवर्टी, अनुपम खेर, पल्लवी जोशी, सास्वत चटर्जी और दरशन कुमार जैसे कलाकारों ने दमदार प्रदर्शन किए हैं।
पल्लवी जोशी ‘मा भारती’ के किरदार में भावनात्मक गहराई ला देती हैं।
सास्वत चटर्जी एक विवादास्पद राजनीतिक नेता के रूप में प्रभावशाली हैं।
निर्देशन की ज़रूरत से ज़्यादा लंबाई के बावजूद, अभिनय के दम पर फिल्म आगे बने रहने का जज़्बा दिखाती है।
विवाद और राजनीतिक प्रतिक्रिया
फिल्म की रिलीज़ को लेकर कोलकाता में भारी विवाद हुआ—वहाँ कई थियेटर्स ने फिल्म नहीं दिखाई।
फिल्म पर कथित “अनौपचारिक प्रतिबंध” लगाए जाने की बात भी सामने आई, जिसे कलाकारों ने सार्वजनिक रूप से चुनौती दी।
गोपाल पत्ता की दामाद ने फिल्म के चरित्र चित्रण पर आपत्ति जताते हुए निर्माता के खिलाफ कानूनी नोटिस भेजा है।
यह विवाद फिल्म का हिस्सा बन चुका है और दर्शकों में इसके प्रति चर्चा बढ़ा रहा है।
बॉक्स ऑफिस और पहली प्रतिक्रिया
खुलासे के पहले दिन, फिल्म ने केवल ₹1.75 करोड़ नेट की कमाई की। यह Baaghi 4 जैसे बड़े स्तर के एक्शन फिल्म से पीछे रही।
फिल्म ने देश में गहरी प्रतिक्रिया तो हासिल की है, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाई।
दूसरी ओर, अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों ने इसे ‘hard-hitting’ और ‘gut-wrenching’ बताया, यानी फिल्म ने भावनात्मक रूप से गहरी छाप छोड़ी।
फिर भी, दर्शकों में इसका व्यूअरशिप धीरे-धीरे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
लंबाई और फिल्म की बनावट
3 घंटे 24 मिनट (204 मिनट) की इस फिल्म को कई समीक्षकों ने बहुत लंबा करार दिया है।
सीन की व्यंग्य रम्यता, मानसिक दबाव और अस्पष्ट गति के कारण कुछ लोग इससे दूरी बनाए रखना चाहेंगे।
लेकिन जो दर्शक इतिहास में गहराई से जाना चाहते हैं, उन्हें यह फिल्म अपनी पकड़ में रखती है।
कोइमोई और NDTV जैसी समीक्षा साइट्स ने इसे “emotionally haunting” और “raw portrayal” बताया है।
दर्शकों की प्रतिक्रिया
X (ट्विटर) पर दर्शकों ने फिल्म को ‘ऐतिहासिक दस्तावेज़’ तक की संज्ञा दी।
कुछ ने इसे ज़्यादा ड्रामाई और पूर्वाग्रहपूर्ण बताया—इसे “propaganda” तक करार दिया गया।
एक दर्शक ने लिखा, “हमें यह स्कूल में सिखाया नहीं गया”—इससे पता चलता है कि फिल्म ने इतिहास पर नए दृष्टिकोण सुझाया है।
दर्शकों की प्रतिक्रियाएँ मिली-जुली हैं—कुछ प्रभावित, कुछ नाराज़, लेकिन सबकी निगाहें फिल्म पर एक सीधी बात की गहराई पर टिक गई हैं।
सारांश पॉइंट्स में
| पॉइंट | विवरण |
|---|---|
| रिलीज़ डेट | 5 सितंबर 2025 |
| ट्रिलॉजी | तीसरी फ़िल्म, The Files Trilogy की आख़िरी कड़ी |
| थीम | 1946 बंगाल साम्प्रदायिक हिंसा—डायरेक्ट एक्शन डे, नोआखली |
| मुख्य कलाकार | Mithun Chakraborty, Darshan Kumar, Pallavi Joshi, Anupam Kher |
| प्रतिक्रिया | भावनात्मक गहरा प्रभाव, विवादास्पद बॉक्स ऑफिस खुलासा |
| समर्थन | गूंजते ऐतिहासिक सच—कुछ इसे “जबरदस्त और ज़रूरी” मानते हैं |
ऐतिहासिक महत्व और सीख
The Bengal Files सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि इतिहास को याद करने का जरिया भी है। 1946 के बंगाल दंगों की कहानी आज की पीढ़ी को यह सोचने पर मजबूर करती है कि समाज में नफरत और विभाजन किस तरह लोगों की जिंदगी को तबाह कर देता है। फिल्म यह संदेश देती है कि हमें अतीत की गलतियों से सीखकर भविष्य में एकता और भाईचारे की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
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