Navratri 2025 Day 2: Maa Brahmacharini पूजा, महत्व, शुभ रंग और मुहूर्त नवरात्रि 2025 का दूसरा दिन पूरी तरह मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। यह वही स्वरूप हैं जो तपस्या, धैर्य और अडिग भक्ति का प्रतीक माने जाते हैं। इस दिन मां की पूजा करने से जीवन में आत्मबल और ज्ञान का प्रकाश आता है, साथ ही यह विश्वास भी कि कठिन परिस्थितियों में भी सही राह पर टिके रहना सबसे बड़ी साधना है ।
मां ब्रह्मचारिणी का रूप बेहद सादा है, हाथों में एक ओर जपमाला और दूसरी ओर कमंडल लिए हुए। शास्त्रों में वर्णन है कि उन्होंने हजारों सालों तक कठोर तपस्या की थी, पहले फूल और फल खाए, फिर हरी पत्तियों पर रहीं और अंत में अन्न-जल तक त्याग दिया। इसी वजह से उन्हें अपर्णा भी कहा गया। यह तपस्या भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए थी और आखिरकार उनकी भक्ति सफल भी हुई |
Day 2 का महत्व
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से व्यक्ति को संयम, शांति और मानसिक मजबूती मिलती है। ग्रहों के अनुसार यह स्वरूप मंगल ग्रह से जुड़ा है, जो भाग्य और शक्ति का कारक माना जाता है। भक्तों का मानना है कि इस दिन मां की पूजा करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और जीवन लंबा तथा उद्देश्यपूर्ण बनता है |
शुभ मुहूर्त (Day 2)
दूसरे दिन की पूजा के लिए कई खास समय बताए गए हैं।
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:35 से 05:22
- प्रातः संध्या: 04:59 से 06:10
- अभिजीत मुहूर्त: 11:49 से 12:37
- विजय मुहूर्त: 02:14 से 03:03
- गोधूलि मुहूर्त: 06:16 से 06:40
- सायं संध्या: 06:16 से 07:28
- निशीथ मुहूर्त: रात 11:50 से 12:37 (24 सितंबर)
इन समयों को विशेष इसलिए माना जाता है क्योंकि इन्हीं में पूजा करने से अधिक फल मिलता है और भक्ति का प्रभाव भी गहरा होता है।
शुभ रंग (Day 2 का रंग)
दूसरे दिन का रंग है लाल। यह रंग ऊर्जा, उत्साह और प्रेम का प्रतीक है। पूजा के दौरान लाल रंग पहनना बेहद शुभ माना गया है। लाल चुनरी मां को अर्पित करना और लाल फूल चढ़ाना भक्तों की मनोकामनाओं को पूरा करने वाला माना जाता है। लाल पहनने से आत्मविश्वास और जोश दोनों बढ़ते हैं |
पूजा विधि (Step by Step)
Day 2 की पूजा विधि सरल है, लेकिन हर एक चरण में श्रद्धा और शुद्धता जरूरी है।
- सबसे पहले पूजा स्थान को साफ करें और शुभ मुहूर्त में पूजा प्रारंभ करें।
- एक कलश स्थापित करें जिसमें पानी, पान के पत्ते और सुपारी रखें, ऊपर नारियल और आम के पत्ते रखें।
- मां ब्रह्मचारिणी की मूर्ति या तस्वीर को लाल चुनरी से सजाएँ और फूल अर्पित करें।
- तिलक लगाकर रोली, चावल और फूल चढ़ाएँ।
- घी का दीपक जलाएँ और धूप-अगरबत्ती अर्पित करें।
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) से मां को स्नान कराएँ।
- 108 बार “ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः” मंत्र का जाप करें।
- अंत में आरती करें और प्रसाद बाँटें |
क्यों खास है यह दिन
नवरात्रि का दूसरा दिन हमें यह याद दिलाता है कि भक्ति केवल दिखावे से नहीं बल्कि त्याग और धैर्य से सिद्ध होती है। मां ब्रह्मचारिणी का जीवन इसी बात का संदेश देता है कि तपस्या का अर्थ है कठिनाइयों के बीच भी आस्था बनाए रखना। भक्त मानते हैं कि इस दिन पूजा करने से जीवन में धैर्य आता है और परिवार में खुशियां बनी रहती हैं।
मां ब्रह्मचारिणी की कथा
कहा जाता है कि हिमालय की पुत्री पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की थी। इस तपस्या के दौरान उन्होंने कई साल तक केवल फल और फूल खाए, फिर केवल पत्तों पर जीवन बिताया और आखिर में अन्न-जल तक त्याग दिया। उनकी इसी कठोर साधना और ब्रह्मचर्य के पालन के कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी कहा गया। यह कथा भक्तों को यह प्रेरणा देती है कि धैर्य और भक्ति से असंभव भी संभव हो जाता है।
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप
मां का स्वरूप बहुत ही शांत और सरल है। उनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे हाथ में कमंडल होता है। साधना और संयम का यह प्रतीक हमें बताता है कि आडंबर और दिखावे से दूर रहकर भी भक्ति का मार्ग अपनाया जा सकता है। मां का यह रूप सीधा-सादा होते हुए भी अत्यंत प्रभावशाली है और यही वजह है कि भक्त इस दिन विशेष ध्यान और जप का अभ्यास करते हैं।
Day 2 की विशेष पूजा सामग्री
Day 2 पर मां ब्रह्मचारिणी को पूजने के लिए खास सामग्री का प्रयोग करना शुभ माना जाता है।
- लाल फूल (गुलाब या गेंदा)
- लाल चुनरी
- शक्कर से बनी मिठाई (विशेषकर मिश्री)
- सिंदूर और रोली
- पंचामृत इन वस्तुओं को अर्पित करने से मां प्रसन्न होती हैं और भक्तों को मानसिक शांति व लंबी आयु का आशीर्वाद देती हैं।
ज्योतिषीय महत्व
मां ब्रह्मचारिणी को मंगल ग्रह का अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष होता है, वे इस दिन मां की पूजा करके इसका निवारण कर सकते हैं। कहा जाता है कि इस पूजा से विवाह संबंधी बाधाएँ दूर होती हैं और साहस के साथ सही निर्णय लेने की शक्ति मिलती है। मंगल ग्रह ऊर्जा और आत्मविश्वास का कारक माना जाता है, और मां की भक्ति से यह गुण व्यक्ति में स्वतः आ जाते हैं।
भक्तों के लिए संदेश
नवरात्रि का दूसरा दिन केवल पूजा या मंत्रों तक सीमित नहीं है। यह हमें यह भी सिखाता है कि धैर्य, संयम और सादगी से बड़ा कोई आभूषण नहीं है। जैसे मां ने कठिन तपस्या की, वैसे ही हमें भी जीवन में आने वाली मुश्किलों को धैर्य और आत्मविश्वास से पार करना चाहिए।
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